Saturday, December 26, 2009

Happy new year

जमीं पे आफ़ताब मिले
उजाला बे हिसाब मिले
नये साल में हर लम्हा
सच होता इक ख्वाब मिले
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प्रश्न सारे हल मिलें
प्रयत्न भी सफ़ल मिलें
आपको नवीन वर्ष में
यूं मुस्कुराते पल मिलें
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रौशनी हो राह् में
उम्मीद हो निगाह में
ये साल् लाके सब वो दे
हैं आप जिसकि चाह में

Tuesday, December 15, 2009

इतिहास लिखेंगे

सच्चे शब्दों में सच के अहसास लिखेंगे,

वक्त पढे जिसको कुछ इतना खास लिखेंगे |

गीत गजल हम पर लिखेंगे लिखने वाले,

हमने कलम उठाई तो इतिहास लिखेंगे ||


आँखों में आँखें डाल के डर को डरायेंगे,

जो हार को हरा दे वो प्रयास लिखेंगे |

तूफ़ान को रोक देंगे मुठ्ठी में भींच के,

है कितना खुद पर वो विश्वास लिखेंगे ||

गीत गजल हम पर लिखेंगे लिखने वाले,

हमने कलम उठाई तो इतिहास लिखेंगे......




हर दबी ज़ुबां में हुंकार ले आयेंगे,

आशाओं की नयी इक बरसात लिखेंगे |

चुन चुन के सपनो को, गुलिस्तां बनायेंगे,

और आने वाले कल को सौगात लिखेंगे ||

गीत गजल हम पर लिखेंगे लिखने वाले,

हमने कलम उठाई तो इतिहास लिखेंगे....

Sunday, December 13, 2009

कवि का कार्य

कठिन कार्य जो कविगण करते, सरल वो दुनिया को लगते हैं,
दुनिया को हरपल यों लगता, हम व्यर्थ ही रातों को जगते हैं....

सबके वश का काम नहीं है, सनाट्टे अनुवादित करना,
मूक़ लबों की बात चुराकर, गूढ़ भाव को साबित करना...
बहते झरनों की कल-कल को, शब्दों में परिभाषित करना,
अविरल बहती पुरवाई को, ठहरा कर संबोधित करना.....

शोषित जन मन की पीड़ा को, ताप भरे शब्दों में कहना,
सीमा सामाजिक लाँघ के भी, अपनी सीमा के भीतर रहना.....
चुप को चुप रखकर भी, चुप के अर्थों को शब्दों में कहना,
चुप के मूक़ वीराने को देना, कुछ संवादों का गहना......

नदिया दरिया झरने झीलें, बिन बोले कुछ कह जाते हैं,
पढ़ लो तो है अनकही गाथा, वरना खाली बह जाते हैं....
असीमित अनुभव संचित कर, चंदा सूरज चुप रह जाते हैं,
इनकी दुर्गम भाषा के भाव, केवल कवि ही कह पाते हैं.....

Friday, December 11, 2009

अलविदा कहके खूब गया कोई

आज् डब डबाते चश्मों में डूब गया कोई,
हां साँसों के सिलसिले से ऊब गया कोई....
ख्वाबों तक ने भी ढूंढे जिसकी आमद् के निशां,

यूं अलविदा कहके क्या खूब गया कोई...


वो दम ए आखिर पे मुस्कुराया होगा,

उसने अंजाम् खुद् का गुनगुनाया होगा....
किसी की याद सबब रही होगी गर जो,
खुद ही अपना मर्सिया उसने जो गाया होगा....

Wednesday, December 9, 2009

कब जाने खुद को भूल गया

खड़ा रहा उस रस्ते पर,
पर पीछे मुड़ना भूल गया...
न आज के साथ मै चल पाया,
और पिछला कल भी भूल गया....
बड़े नामों की दुनिया में,
मै काम बड़े करता आया....
पर छोटी छोटी बातों पर,
मै खिलकर हँसना भूल गया.....


बिना किसी को साथ लिए,
मै सात समुन्दर फिर आया....
पर घर को जाने वाली नन्ही,
उन गलियों को मै भूल गया.....


कर मेल जोल सब लोगों से,
कई दोस्त बनाए मिल मिल के....
दो लफ्ज़ सुनने को घर बैठी,
माँ से बात मै करना भूल गया.....
खूब कमाई की मैने,
और नाम कमाया दुनिया में....
पर खुद को साबित करने में,
कब जाने खुद को भूल गया....